सुशासन बाबू के सरकार में रसाढ के बोतल घाट पर नहीं बन पाया पुल
सुशासन बाबू के सरकार में रसाढ के बोतल घाट पर नहीं बन पाया पुल

बनमनखी (पूर्णियां): अनुमंडल के जहां एक तरफ बिहार सरकार सभी जिलों के लोगों को राजधानी आने-जाने हेतु दूरी व समय कम करने हेतु लगातार प्रयासरत हैं तो वहीं बनमनखी प्रखंड के हरिमुढी पंचायत के रसाढ बोतल घाट होते हुए बनमनखी से बैरख कोशकापुर होते हुए रानीगंज जाने का सबसे सटीक व सीधा रुट को वर्षों से नजरअंदाज किया जा आ रहा है। उक्त बातें वहां के ग्रामीण सदानंद मंडल, घनश्याम मंडल, रघुनंदन पटेल, विकास कुमार, गोपाल बास्की, सोनेलाल बास्की, गोपाल टुडू, रवीन्द्र मंडल, दीपक कुमार मंडल, रुदो मंडल, बिटका किस्कू, बाबूराम किस्कू आदि ने कही है। उन्होंने कहा कि यहां पुल बन जाने से जहां इन दोनों प्रखंडों के बीच की दूरी आधी हो जाएगी। वहीं इन दोनों प्रखंडों के 8-10 पंचायतों के लोगों को सीधा लाभ होगा। बोतल घाट पर एक पुल के लिए वर्षों से मांग की जाती आ रही है। दो बार मुख्यमंत्री के हाथों में जनता दरबार कार्यक्रम के माध्यम से मांगपत्र सौंपा गया। पूर्णिया के पूर्व सांसद, सांसद, स्थानीय विधायक द्वारा कई बार ठोस आश्वासन भी दिया गया है। लगातार 20 वर्षों से यहां के भोले-भाले लोगों को गुमराह करने हेतु दिया गया यह आश्वासन सिर्फ और सिर्फ आश्वासन हीं बन कर रह गया है। जबकि बनमनखी प्रखंड मुख्यालय से बोतल टोला की दूरी महज 8 किलोमीटर है, नदी के दोनों तरफ पक्की सड़क भी बना हुआ है। लेकिन इस बीच में नदी पर एक पुल नहीं होने से मजबूरी में 8 किलोमीटर की जगह 15 किलोमीटर अनावश्यक दूरी नियमित तय करनी पड़ती है वो भी विपरीत दिशा से घुमकर। यहां के लोगों को प्रखंड मुख्यालय आने जाने हेतु वर्षों से काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता आया है, वो भी बरसात के दिनों में बाढ़ के समय में तो मुसीबतें और भी बढ़ जाती है। किसी बीमारी व असहाय लोगों को इलाज़ कराने हेतु इतनी लंबी दूरी को देखते हुए प्रखंड व जिला मुख्यालय आने जाने में अपव्यय खर्च के साथ-साथ समय की बर्बादी होती है।
